कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi
[ad_1] बात लगभग 40 साल पहले की है जब विवाह को दो दिलों का मेल ना समझ कर बस एक रस्म की तरह निभाया जाता था| लेकिन जब दो अजनबी अचानक अपनि ज़िन्दगी किसी के साथ बाँटने लग जाए, जब किसी के लिए दिल में सम्मान के भाव आने लग जाए तो प्यार हो ही जाता है| खैर चलिए इतना तो आप जानते ही है और यह भी जान गए होंगे की हम आपको आज यह प्यार मुहोब्बत वाली बातें क्यों बता रहें हैं, जी हाँ आज हम आपके लिए प्यार भरी एक और कहानी लेकर आए हैं, कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi रश्मिता घर में सबसे चंचल थी| दिन भर मस्ती करना, घर में धमा-चोकड़ी करना और इन सब से मन भर जाए तो मुहोल्ले भर की आंटियों-चाचियों के घर टटोल आना| बस उसका दिन भर का यही काम था| यूँ कहें की मुहोल्ले की जान थी हमारी 14 बरस की रश्मि| पढाई-लिखाई से दूर-दूर तक कोई नाता न था| हालाँकि आज से 40 बरस पहले उस ज़माने में लड़कियों की पढाई-लिखी पर ध्यान कौन देता था| वैसे तो रश्मि घर में सबकी लाडली थी लेकिन अपने दादाजी की वो जान थी| बचपन से अपने दादाजी से ही उसने ज़िन्दगी का पाठ ...