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Shayari, Sher O Shayari, Emotional Shayari

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[ad_1] Insaan Kho Gaye Hain - Hindi Shayari जाने क्यूं अब शर्म से,चेहरे गुलाब नही होते। जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने क्यूं अब चेहरे, खुली किताब नही होते। सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे। गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे। तब ना फेस बुक ना स्मार्ट मोबाइल था ना फेसबुक ना ट्विटर अकाउंट था एक चिट्टी से ही दिलों के जज्बात समझ लेते थे। सोचता हूं हम कहां से कहां आ गये, प्रेक्टीकली सोचते सोचते भावनाओं को खा गये। अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहां पूछता है अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहां पूछता है बेटी नही पूछती मां से गृहस्थी के सलीके अब कौन गुरु के चरणों में बैठकर ज्ञान की परिभाषा सीखे। परियों की बातें अब किसे भाती है अपनो की याद अब किसे रुलाती है अब कौन गरीब को सखा बताता है अब कहां कृष्ण सुदामा को गले लगाता है जिन्दगी मे हम प्रेक्टिकल हो गये है मशीन बन गये है सब, इंसान जाने कहां खो गये है! इंसान जाने कहां खो गये है. [ad_2] Source link

ननंद | Emotional Story in Hindi | Hindi Kahaniyan

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[ad_1] दुनियां में हर इन्सान की अहमियत है और हर एक इन्सान की अपनी एक अलग सोच| इस दुनियां में हर इन्सान दुनिया की सोच बदलने की ताक़त रखता है| आज की हमारी युवा पीढ़ी और परिवार के बिच गई मुद्दों पर अलग-अलग सोच है| हमारी आज की कहानी इसी सोच के एक पहलु को बयां करती है, आइये पढ़ते हैं ननंद | Emotional Story in Hindi                            ननंद | Emotional Story in Hindi शिखा !  परिवार की लाडली बिटिया या फिर यूँ कहें की परिवार की आन, बान और जान| जब घर में होती तो ऐसा लगता मानों घर में आसमान टूट पड़ा हो| घर में इधर उधर धमा-चोकड़ी करना और खूब सारी बातें करना उसके पसंदीदा कामों में से एक था| शिखा के दादाजी शिखा को बहुत प्यार करते थे, लेकिन आजकल उन्हें शिखा की एक चिंता और खाए जा रही थी और वो थी शिखा की शादी की चिंता| बस दादाजी अब हर परिवार में शिखा का ससुराल ढूंढते| लेकिन शिखा को शादी नाम से ही इतनी चिढ थी कि शादी का नाम सुनते ही वह गुस्सा होकर, मुह फुला कर दुसरे कमरे में बैठ जाती| खैर, थोड़ी देर में उसका गुस्सा खुद-ब-खुद उतर जाता और वो वापस अपनी धमा-चोकड़ी में व्यस्त हो जाती| काफी खोज-बिन के बाद भी...