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संगठन | Short Story on Unity

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[ad_1] भैया ये बात तो साफ है की अगर संघठन में रहकर कोई काम किया जाए तो उस काम के सफल होने की संभावनाए कई गुना बढ़ जाती है| इसी बात से रूबरू कराती है आपको हमारी कहानी “संगठन | Short Story on Unity”   जहाँ आप संगठन और संगठन से होने वाले  के बारे में जन सकेंगे| तो लीजिये पेश है आज की हमारी कहानी……..                               संगठन | Short Story on Unity बात सालों पुरानी है…. मथुरा के पास एक गाँव था| उस गाँव में एक लकडहारा रहता था| लकडहारा रूज सुबह सुबह जंगल में लकड़ियाँ लेने जाता और शाम को गाँव में आकर बेच देता| एक बार जब लकडहारा सुबह सुबह जंगल की और गया तो उसे जंगल में एक गड्ढे में जंगली श्वान के बच्चे को गिरा हुआ देखा| लकडहारे ने श्वान को गड्ढे से निकला और उसका उपचार करने के लिए अपने साथ अपने घर ले आया| कुछ ही समय में श्वान का बच्चा लकडहारे के परिवार से बहुत अच्छे से घुल-मिल गया| जब श्वान का बच्चा बड़ा हुआ तो लकडहारे ने सोचा  की “श्वान के लिए जंगल का खुला वातावरण ही अच्छा रहेगा इसलिए अब इसे जंगल में छोड़ देन चाहिए” | बस लकडहारे के सोचने भर की देर थी, अगले दिन ही लकडहारा श्वान को जं...

परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language

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[ad_1] अपनी मात्रभाषा में कहानी पढने का कुछ मज़ा ही अलग है| इसीलिए हम हमारे पाठकों के लिए हमारी वेबसाइट hindishortstories.com में हिंदी में नई-नई कहानियां लेकर आते हैं| इसी कड़ी में पेश है हमारी एक और नई कहानी “परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language”               परिश्रम का महत्व | Story in Hindi Language बात तब की है जब बीमारियाँ एक पहाड़ पर रहा करती थी| पहाड़ बिमारियों को अपनी बेटी की तरह पालता पोसता था| बीमारियाँ पहाड़ के इस उपकार के लिए पहाड़ का अहसान मानती और हमेशा पहाड़ के इस अहसान के लिए किसी भी उपकार के लिए इच्छुक रहती| लेकिन पहाड़ तो पहाड़ ठहरा, था ही इतना विशाल और अपनी जगह डटा हुआ की उसे कभी बिमारियों के किसी उपकार की ज़रूरत ही नहीं पड़ी| पहाड़ की तलहटी में ही एक गाँव था| कुछ दिन बीते और गाँव के एक किसान को खेती के लिए अतिरिक्त ज़मीन कि ज़रूरत पड़ी| किसान को कहीं ज़मीन दिखाई नहीं दी| अचानक किसान की नज़र हजारों एकड़ जमीन दबाए हुए पहाड़ पर पड़ी| किसान ने सोचा क्यों ना पहाड़ को खोदकर खेती योग्य जमीन को निकाल दिया जाए| ] बस फिर क्या था, किसान के सोचने भर की देर थी और उसने पहाड़ को खोदकर कई साड...

कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi

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[ad_1] बात लगभग 40 साल पहले की है जब विवाह को दो दिलों का मेल ना समझ कर बस एक रस्म की तरह निभाया जाता था| लेकिन जब दो अजनबी अचानक अपनि ज़िन्दगी किसी के साथ बाँटने लग जाए, जब किसी के लिए दिल में सम्मान के भाव आने लग जाए तो प्यार हो ही जाता है| खैर चलिए इतना तो आप जानते ही है और यह भी जान गए होंगे की हम आपको आज यह प्यार मुहोब्बत वाली बातें क्यों बता रहें हैं, जी हाँ आज हम आपके लिए प्यार भरी एक और कहानी लेकर आए हैं,  कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi                                               कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi रश्मिता घर में सबसे चंचल थी| दिन भर मस्ती करना, घर में धमा-चोकड़ी करना और इन सब से मन भर जाए तो मुहोल्ले भर की आंटियों-चाचियों के घर टटोल आना| बस उसका दिन भर का यही काम था| यूँ कहें की मुहोल्ले की जान थी हमारी 14 बरस की रश्मि|  पढाई-लिखाई से दूर-दूर तक कोई नाता न था| हालाँकि आज से 40 बरस पहले उस ज़माने में  लड़कियों की पढाई-लिखी पर ध्यान कौन देता था| वैसे तो रश्मि घर में सबकी लाडली थी लेकिन अपने दादाजी की वो जान थी| बचपन से अपने दादाजी से ही उसने ज़िन्दगी का पाठ ...

ननंद | Emotional Story in Hindi | Hindi Kahaniyan

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[ad_1] दुनियां में हर इन्सान की अहमियत है और हर एक इन्सान की अपनी एक अलग सोच| इस दुनियां में हर इन्सान दुनिया की सोच बदलने की ताक़त रखता है| आज की हमारी युवा पीढ़ी और परिवार के बिच गई मुद्दों पर अलग-अलग सोच है| हमारी आज की कहानी इसी सोच के एक पहलु को बयां करती है, आइये पढ़ते हैं ननंद | Emotional Story in Hindi                            ननंद | Emotional Story in Hindi शिखा !  परिवार की लाडली बिटिया या फिर यूँ कहें की परिवार की आन, बान और जान| जब घर में होती तो ऐसा लगता मानों घर में आसमान टूट पड़ा हो| घर में इधर उधर धमा-चोकड़ी करना और खूब सारी बातें करना उसके पसंदीदा कामों में से एक था| शिखा के दादाजी शिखा को बहुत प्यार करते थे, लेकिन आजकल उन्हें शिखा की एक चिंता और खाए जा रही थी और वो थी शिखा की शादी की चिंता| बस दादाजी अब हर परिवार में शिखा का ससुराल ढूंढते| लेकिन शिखा को शादी नाम से ही इतनी चिढ थी कि शादी का नाम सुनते ही वह गुस्सा होकर, मुह फुला कर दुसरे कमरे में बैठ जाती| खैर, थोड़ी देर में उसका गुस्सा खुद-ब-खुद उतर जाता और वो वापस अपनी धमा-चोकड़ी में व्यस्त हो जाती| काफी खोज-बिन के बाद भी...